नई दिल्ली: सनातन परंपरा में अंतिम संस्कार को जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों में माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद किए जाने वाले प्रत्येक कर्म का विशेष महत्व होता है। गरुड़ पुराण में भी अंतिम संस्कार से जुड़े कई नियमों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में एक प्रमुख नियम मृतक के शरीर को चिता पर रखने की दिशा से संबंधित है, जिसे आत्मा की शांति और मुक्ति से जोड़कर देखा जाता है।
गरुड़ पुराण में क्या बताया गया है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार के समय मृतक के शरीर को इस प्रकार रखा जाना चाहिए कि उसका सिर उत्तर दिशा की ओर और पैर दक्षिण दिशा की ओर हों। धार्मिक मान्यता है कि इस व्यवस्था का पालन करने से आत्मा की शांति और आगे की यात्रा में सहायता मिलती है।
उत्तर-दक्षिण दिशा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद शरीर की जीवन ऊर्जा समाप्त हो जाती है और शरीर केवल भौतिक स्वरूप में रह जाता है। ऐसे में उत्तर-दक्षिण दिशा में शव रखने को शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिशा में प्रवाहित होने वाली सूक्ष्म ऊर्जा मृत शरीर के चारों ओर एक प्रकार का संरक्षण प्रदान करती है, जिससे आत्मा की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
दक्षिण दिशा को क्यों माना जाता है विशेष?
गरुड़ पुराण में दक्षिण दिशा को यम की दिशा बताया गया है। धार्मिक दृष्टि से यह दिशा मृत्यु के बाद आत्मा की अगली यात्रा का प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण अंतिम संस्कार के समय मृतक के पैर दक्षिण और सिर उत्तर दिशा की ओर रखने की परंपरा का उल्लेख मिलता है।
चिता पर शव रखने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान शव को चिता पर निर्धारित दिशा में रखा जाता है। इसके बाद पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार वैदिक मंत्रों अथवा रामायण और भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया जाता है। कई परंपराओं में मृतक के मुख में तुलसी युक्त जल अर्पित करने और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख मिलता है।
धार्मिक मान्यता के रूप में देखा जाता है यह नियम
गरुड़ पुराण में वर्णित ये नियम धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार की विधियों में कुछ अंतर भी देखने को मिल सकता है। श्रद्धालु सामान्यतः अपने कुलाचार, स्थानीय रीति-रिवाज और पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार इन विधियों का पालन करते हैं।
